जाने क्या है जाने क्या नहीं
बहुत है मगर फिर भी कुछ नहीं
तुम हो मै हूँ और ये धरा
फिर भी जी है भरा भरा
कभी जो सोचूँ तो ये पाऊँ
मन है बावरा कैसे समझाऊ
कि न मैं हूँ न हो तुम
बस कुछ है तन्हा सा गुम.......................
सुमन 'मीत'

अनमने भावो कि सुंदर प्रस्तुति.
जवाब देंहटाएंकि न मैं हूँ न हो तुम
जवाब देंहटाएंबस कुछ है तन्हा सा गुम.......................
वाह भावों की कितनी सुंदर अभिव्यक्ति ।