परिकल्पना की रजत जयंती यात्रा के सम्मान में एक विशेष आयोजन


बाकू (अजरबैजान) में परिकल्पना की रजत जयंती यात्रा के सम्मान में एक विशेष आयोजन किया गया, जिसमें परिकल्पना से जुड़े सम्मानित सदस्यों को विशेष सम्मान प्रदान किए गए। इस अवसर पर परिकल्पना परिवार के 17 सदस्यों को रजत पदक प्रदान किया गया। 


परिवार के आठ सदस्यों क्रमश: श्री निर्भय नारायण गुप्ता, डॉ सत्या सिंह, श्री मती निशा मिश्रा, डॉ प्रतिमा वर्मा, डॉ बालकृष्ण पांडेय, श्री मती नम्रता मिश्रा, डॉ प्रमिला उपाध्याय और श्री मती सरोज सिंह को अंगवस्त्र, रजत पदक, मोमेंटो एवं मानपत्र के साथ परिकल्पना रजत जयंती सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पच्चीस हजार नकद सम्मान राशि एवं अंगवस्त्र, रजत पदक, मोमेंटो एवं मानपत्र के साथ परिकल्पना सम्मान प्रदान किया गया। 


साथ हीं हिंदी पत्रिका रेवांत की ओर से परिकल्पना परिवार को विशेष रूप से इस उपलब्धि के लिए प्रशंसित किया गया।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रवीन्द्र प्रभात ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इन दरिंदों को सरेआम सज़ा-ए-मौत दे दो मी लॉर्ड


जगदीश बाली
9418009808
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 आज से लगभग पांच वर्ष पहले 23वर्षीय निर्भया से सामूहिक दुष्कर्म और उसकी लोमहर्षक हत्या से दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरा देश दहल उठा था और मोमबत्तियां जलाते हुए लोग आंदोलन के रूप में सड़कों पर उतर आए थे। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में स्कूल की एक छात्रा के साथ पिछले वर्ष ऐसा ही दिल दहला देने वाला सामूहिक दुराचार और हत्या का मामला सामने आया। उस समय भी लोग सड़कों पर उतर आए थे। इन दो घटनाओं को याद कर अब ज़रा कल्पना कीजिए - आठ माह की बच्ची की, उसके मासूम चेहरे की, उसकी किलकारियों की और उसकी मुस्कुराहट की। क्या आप इस मासूम फूल सी बच्ची के बालात्कार की घटना के बारे में सोच भी सकते हैं? परन्तु जो कुछ हो रहा है वो यही ब्यां करता है कि मालूम नहीं इंसान कितने नीचे गिर सकता है!  ये समझ से परे है कि इंसान के रूप में दरिंदे हैवानियत की किस हद तक पहुंच सकते हैं। 
 मैं बात कर रहा हूं चंद रोज़ पहले की उस घटना की जिसकी खबर सुनकर पूरा देश एक बार फिर सकते में आ गया और इंसानियत एक बार फिर खून के आंसू रोई। हमारे देश की राजधानी व भारत का दिल, दिल्ली ये सुनकर दहल उठी कि यहां की शकूरबस्ती क्षेत्र में आठ महीने की मासूम बच्ची के साथ बर्बरता पूर्ण दुष्कर्म किया गया है। ये सुन कर रौंगटे खड़े हो गए और शरीर का रोम रोम थर्रा उठा कि इस वहशियाना दुष्कर्म को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि उस बच्ची के ताऊ का सताईस वर्षीय बेटा है। इस खबर के बारे में जब सुना तो कानों पर भरोसा न हुआ, इस खबर को जब पढ़ा तो आंखो पर भी शक होने लगा। जब न्यूज़ चैनल्ज़ पर देखा, तो विश्वास करना ही पड़ा। इस खबर ने दिल को अंदर तक दहला दिया, मन और मस्तिष्क विचलित हो उठे। तीन घंटे के ऑपरेशन के दौरान अस्पताल के आई.सी.यू.से असहनीय और अनहद दर्द से जूझती असहाय बच्ची की चीखों का एहसास ज़रा सी इंसानी भावना रखने वाला कोई भी इंसान सहज़ ही कर सकता है। उस बच्ची की पीड़ा के बारे में सोचते-सोचते मेरा ध्यान खुशी से उछलती कूदती अपनी बेटी की ओर गया। कहीं इसके साथ भी कभी ऐसा हो गया...। ज़रा सोचिए - आठ महीने की बेटी के साथ ऐसा बर्बरतापूर्ण दुष्कर्म! फिर सोचिए अगर ऐसा आपकी बेटी के साथ हो!  या खुदा... 
 चंडीगढ़ की उस 10 वर्षीय बच्ची के बारे में भी सोचिए जिसे उसके ही चाचा के दुराचार ने मां बना दिया और इस मासूम को पता भी नहीं उसके साथ क्या हुआ है और मां बनना क्या होता है। खिलौनों से खेलने वाली10 वर्षीय मासूम बच्ची क्या जानें उसके साथ क्या हुआ है। ऐसी दरिंदगी देख क्या आपका मन ये चीख-चीख कर नहीं कहता - इन दरिंदों को सरेआम चौराहे पर सज़ा-ए-मौत दे दो माई लॉर्ड... ? 
  सितंबर 2016 में दिल्ली में ही एक मज़दूर ने 11 महीने की बच्ची से दुराचार किया और उसे मरा हुआ समझ कर झाड़ियों में छोड़ दिया। कुछ समय पहले हरियाणा के पानीपत क्षेत्र में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया, उसका गला घोंट दिया गया और दरिंदे यहां भी नहीं रुके और गला घौंटने के बाद भी दुष्कर्म करते रहे। हरियाणा के ही ज़िंद में 15 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म करने के बाद बेरहमी से मार दिया गया।  पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल के माल्दा ज़िले के एक गांव में 9 वर्षीय मासूम से लगातार तीन दिन तक दुराचार किया गया और फिर उसे एक सुनसान इमारत में लटका दिया गया। इसी राज्य में कुछ महीने पहले एक दरिंदे ने 13 वर्षीय बालिका को दुष्कर्म करने के बाद मार दिया। देश की राजधानी दिल्ली में एक 60 वर्षीय ने दो नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया और उन्हें 5 रूपए देकर घटना के बारे में किसी से बात ना करने को कहा। ये वो मामले हैं जिनमें नबालिग बच्चियां दरिंदगी का शिकार हुई है। इसके अलावा महिलाओं से बलात्कार के मामले तो और भी अधिक है।
 निर्भया दुराचार मामले को पांच साल से अधिक हो गए हैं। उस समय इस अपराध के लिए उठी आम जन की आवज़ से लगा था कि शायद तसवीर बदलेगी और सख्त कानून बनेगा, परन्तु बलात्कार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। कानून कह रहा है कि सब कुछ कानून के अनुसार होगा। बीते पांच वर्षों पर नज़र दौड़ाई जाए, तो बलात्कार के मामलों में भारी वृद्धि हो रही है। देश के तमाम कोनों से आए दिन सामूहिक बलात्कार की खबरें आती ही रहती हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता हो, जब किसी महिला के साथ दुष्कर्म की खबर ना आती हो। नैश्नल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) के अनुसार 2015 में देश भर में बलात्कार के 34000 से ज्यादा मामले सामने आए, जबकि 2016 में 34600 मामले दर्ज़ किए गए। 2015 में 10854 मामले बालदुराचार के दर्ज़ किए गए जो बढ़ कर 2016 में 19765 तक पहुंच गए अर्थात 82 प्रतिशत की सैलाना वृद्धि। ये आंकड़े एक अंधेरी और भयावह तस्वीर पेश करते हैं। हमारे देश की राजधानी दिल्ली तो महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक होती जा रही है। थॉम्पसन रॉयटर्स फॉउंडेशन ने जून-जुलाई 2017 के बीच दुनिया के 19 महानगरों में एक सर्वे कराया जिसमें सामने आया है कि दिल्ली महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक महानगर है। 
 चंद कामयाब महिलाओं की उपलब्धियों को गिना कर हम बाकी बहू-बेटियों की दुर्दशा पर पर्दा डालकर सच्चाई से नहीं भाग सकते। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ - ये नारा तो अच्छा है, परन्तु क्या हम बेटियों को महफ़ूज़ रख पा रहे हैं? अगर बेटियां महफ़ूज़ ही नहीं, तो फिर पढ़ाएंगे किसे? खैर ज़िम्मेदारी केवल सरकार की नहीं बल्कि ज़िम्मेदारी हमारी, आपकी और समाज की भी बनती है। आज किसी और की बेटी दरिंदगी का शिकार हुई है, कल मेरी और आपकी बेटी भी तो हो सकती है। इसलिए ऐसे दरिंदों का समाजिक बहिषकार कीजिए। इन्हें पकड़वाने में कानून का साथ दीजिए। और हां, ये दरिंदे बहुतायत आपके आस-पास हो सकते हैं। एन.सी.आर.बी ने खुलासा किया है कि  2015 की जानकारी के अनुसार 95 प्रतिशत बलात्कार जान पहचान वालों ने किए। इनमे से 27 प्रतिशत पड़ोसियों ने और 9 प्रतिशत परिवार के नज़दीकि सदस्य या रिश्तेदारों ने किए। इसलिए चौकन्ने रहिए। कहीं कोई दरिंदा अपके आस-पास आपकी बहू बेटियों पर बुरी नज़र तो नहीं रख रहा । हो सकता है वह घिनौनी हरकत करने की फिराक में हो। हर बेटी के मां-बाप को चौकन्ने रहने की सलाह दूंगा। समाज के पढ़े-लिखे ज़िम्मेदार लोगों को बाल दुराचार के विरुद्ध मशालें उठा कर एक जन अंदोलन करना चाहिए। सरकारों पर निर्भर मत रहिए। सरकारें तो आती-जाती रहेंगी, मगर आपकी बेटी की मासूमियत, अस्मत और स्वाभिमान पर लगे वो धब्बे शायद कभी न मिटे।   
हमें नहीं मालूम कानून की दलील क्या है, मगर एक बेटी के मां-बाप की तो यही इल्तज़ा है - इन दरिंदों को सरेआम सज़ा-ए-मौत दे दो माई लॉर्ड...

रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म के मायने: डॉ॰ विरेन्द्र कुमार बसु

पुस्तक समीक्षा

रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म नामक पुस्तक डॉ॰ सियाराम द्वारा लिखित है, जो कानपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत तिलक महाविद्यालय में एसिस्टेंट प्रोफेसर हैं। यह पुस्तक कानपुर विश्वव्द्यालय से लघुशोध पर आधारित है। लेखक के अनुसार इस पुस्तक में व्यक्त विचार अनेकानेक लेखकों, समीक्षकों, संस्थाओं, पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों आदि से संदर्भ सहित प्रस्तुत किए गए हैं। इस पुस्तक की भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ राम बहादुर मिश्र ने लिखी है, जिसमें उन्होने रवीन्द्र प्रभात को लोक मेधा का कलमकार माना है, वहीं उन्होने स्वीकार किया है कि रवीन्द्र प्रभात के लेखन की विशेषता है कि वे जिस जीवन और समाज से अनुभव बटोरते हैं उससे अगाध प्रेम भी करते हैं।  यही कारण है कि उनके पास एक भोगा हुआ यथार्थ है जिसे उन्होने शब्दों में पिरोया है। उन्होने यह भी स्वीकार किया है, कि रवीन्द्र प्रभात लोकभाषा की ताकत को भलीभाँति समझते हैं और उसका सटीक प्रयोग भी करते हैं। वस्तुत: वे लोक मेधा के ऐसे रचनाकार हैं जो लोक की हर प्रवृति से वाकिफ हैं।

पुस्तक के लेखक का मानना है, कि रवीन्द्र प्रभात पहले एक सशक्त साहित्याशिल्पी हैं और बाद में हिन्दी के प्रथम ब्लॉग विश्लेषक। रवीन्द्र प्रभात की पहचान और लोकप्रियता हिन्दी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सर्वाधिक है। वे हिन्दी ब्लॉग आलोचना के स्तंभ पुरुष हैं। हालांकि आलोचना कर्म सदैव से ही विवादों के घेरे में रहा है लेकिन रवीन्द्र प्रभात की ब्लॉग आलोचना लाभ-लोभ, पद-प्रतिष्ठा के सारे प्रलोभनों से अलग, अपनी व्यापक दृष्टि और अपने विचार के प्रति पूरी निष्ठा और संकल्पों के साथ प्रतिबद्ध हैं और यही इनकी ब्लॉग आलोचना की बड़ी विशेषता है।

86 पृष्ठ के इस पुस्तक में सबसे पहले रवीन्द्र प्रभात के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विहंगम दृष्टि डाली गयी है। उसके बाद उनकी काव्य चेतना के विविध रचनाधर्मी आयाम को विश्लेषित किया गया है। तत्पश्चात उनके कथा साहित्य में संघर्ष और द्वंद्व, व्यंग्य और सामाजिक परिस्थितियाँ, हिन्दी ब्लॉग आलोचना में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाले गए हैं। इस पुस्तक में रवीन्द्र प्रभात के साहित्य में प्रयुक्त सुभाषित को भी प्रस्तुत किया गया है। साथ ही इस पुस्तक में चार साक्षात्कार क्रमश: आलोक उपाध्याय, जागृति शर्मा, निशा सिंह और डॉ॰ सियाराम के द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं, जो इस पुस्तक की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है।

यह पुस्तक एक शोध ग्रंथ है जो साहित्यकार और चिट्ठाकार रवीन्द्र प्रभात के व्यक्तित्व व कृतित्व पर एकाग्र है। भाषा का लालित्य और विंब प्रशंसनीय है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है, कि यह पुस्तक सहेज कर रखने लायक है और अन्य शोध हेतु प्रयुक्त होने वाली सर्वोत्कृष्ट सामग्री है।




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पुस्तक का नाम: 
रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म
प्रकार: पेपर बैक
लेखक : डॉ॰ सियाराम
प्रकाशक: अवध भारती प्रकाशन नरौली, हैदरगढ़, बाराबंकी (उ॰ प्र॰)
आई॰ एस॰ बी॰ एन॰ 9978-93-83967-35-3

मूल्य: 180 रुपये 
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स्‍वतंत्रता दिवस 2013

राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला बड़ागांव शिमला ने स्‍वतंत्रता दिवस को हर्षोल्‍लास के साथ मनाया। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता ग्राम पंचायत बड़ागांव की प्रधान विजया वर्मा ने की । कार्यक्रम का आरम्‍भ पाठशाला परिसर में शहीद सतीश वर्मा के प्रतीमा पर माल्‍यार्पण से हुआ। इसके बाद मन्दिर परिसर में मार्चपास्‍ट और सांस्‍कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।  इस अवसर पर राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक  पाठशाला बड़ागांव, सरस्‍वती विद्या मन्दिर बड़ागांव और सरस्‍वती विद्या मन्दिर कन्‍हा के विद्यार्थीयों ने रगांरग सांस्‍कृतिक कार्यक्रम प्रस्‍तुत किया। इस मौक पर ग्राम पंचायत बड़ागांव उप प्रधान राजेश नलवा , भरेडी के उप प्रधान देव राज शाडिंल, पूर्व पंचायत प्रधान पूर्ण कश्‍यप, स्‍कूल प्रबधंन समिति अध्‍यक्ष जय चंद वर्मा और सदस्‍य, शक्ति केन्‍द्र प्रभारी मुकेश वर्मा सहित अनेक गणमान्‍य व्‍यक्ति विद्यालयों के अध्‍यापक और जन समूह उपस्थित थे।







राष्‍ट्रीय युवा दिवस 2013

 स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150 वी जयन्‍ती के अवसर पर शिमला के
Blockquote-open.gif संयम की तपस्‍या से संतोष का सुख प्राप्‍त होता है। Blockquote-close.gif
स्‍वामी विवेकानन्‍द 
इन्दिरा गांधी खेल परिसर में युवा सेवा एवं खेल विभाग ने विभिन्‍न सांस्‍कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। आयोजन के मुख्‍य अतिथि विभाग के उप निदेशक श्री विरेन्‍द्र नेगी थे1  जिला युवा सेवाऐं एवं खेल अधिकारी ओ पी भोटा ने स्‍वामी विवेकानन्‍द के चित्र पर माल्‍यार्पण किया और द्वीप प्रजवल्लित कर कार्यक्रम का शुभारम्‍भ किया।  अपने सम्‍बोधन में मुख्‍यातिथि ने युवाओं से स्‍वामी विवेकानन्‍द की शिक्षाओं को जीवन में आत्‍मसात करने का आहवान किया।

उन्‍होने युवाओं से एक स्‍वच्‍छ समाज में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह कर विवेकानन्‍द की शिक्षाओं के प्रसार प्रचार पर बल दिया। उन्‍होने विजेताओं को पुरस्‍कार भी वि‍तरित किये।


 परिणाम इस प्रकार रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता
प्रथम  अतर सिंह, ढली
द्वितीय नयनसी, ढली
तृतीय राधा, ढली

निबन्‍ध लेखन 
प्रथम  मानसी, ढली
द्वितीय निशान, शिमला
तृतीय सुरेन्‍द्र, कोटखाई



भाषण प्रतियोगिता
प्रथम रजनी, शिमला
द्वितीय प्रतिभा, शिमला
तृतीय सुनीता, शिमला


लोक समूह गान
प्रथम  सांस्‍कृतिक दल ठियोग
द्वितीय आई टी आई शिमला







ओ पी भोटा ने बताया कि जिले भर में सात अलग अलग स्‍थानों पर स्‍थानीय युवा मण्‍डलों के सहयोग से इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाऐगे। राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम 19 जनवरी 2013 को शिमला में आयोजित किया जाऐगा।

लोक गायक सुनील शर्मा नहीं रहे

प्रदेश के प्रसिद्ध लोक गायक सुनील शर्मा का गत दिन हृदय गति रूकने से निधन हो गया। वे 30 वर्ष के थे ।  उनके प्रसिद्ध लोकगीतों में इक आधिया मंगाई जा रे , खिंदटा माठिये तेरे देणा की ना थे। सुनील शर्मा मूल रूप से जिला सिरमौर के देवठी गांव के थे। सुनील शर्मा ने विभिन्‍न लोक गायकों और गायिकाओं के साथ अपनी कैसेटें निकाली थी। उनके गीतों ने प्रदेश के लोगों को प्रभावित किया था। विक्‍की चौहान, कुलदीप शर्मा अन्‍य  लोक गायकों ने उनके असमायिक निधन पर गहरा शोक व्‍यक्‍त किया है।

कानून कार्यवाही का हक देता है अभद्रता का नहीं


कानून कार्यवाही का हक देता है अभद्रता का नहीं

दीपक 'कुल्लुवी' (देहली ब्यूरो चीफ) न्यूज़ प्लस ऑन लाईन चैनल I

डी0 टी0 सी0  बसों की चैकिंग के लिए तैनात टिकेट चैकर जो लगभग  पाँच से सात  की संख्या में होते हैं ,बिना टिकट पकड़ी गई स्वारी से  अक्सर ऐसा अभद्र  व्यबहार करते नज़र आते हैं की देखने वालों को शर्म आ जाए यह ठीक है बिना टिकट पकड़ी गई स्वारी को निश्चित तौर पर सज़ा  मिलनी  चाहिए लेकिन अभद्रता  क्यों ? गन्दी गन्दी गलियां क्यों ? ऐसा करके तो वोह सब भी  गुनाहगार  बन जाते हैं  पाँच ,दस रुपए  की टिकेट के लिए उस व्यक्ति की इज्जत का जनाज़ा  निकल जाता है I 
हाल ही में ऐसा नजारा  मैंने गोविंदपुरी मैट्रो स्टेशन के साथ लगते श्यामनगर  बस स्टैंड पर भी  देखा टिकेट चैकरों की टीम एक असहाय बीस बरस के लड़के को माँ,बहन की गलियां दे रहे थे उनके मोटे ताज़े बाउंसर उसको पकड़कर इधर उधर खींच रहे थे लड़का बार बार कह रहा था मैंने  टिकेट चैकरों को दिया था लेकिन टिकेट चैकर यह कह रहे थे वोह टिकेट किसी दूसरे व्यक्ति नें दिया था लेकिन यह लोग माननें को तैयार ही नहीं थे वह अच्छे घर का पढ़ा लिखा लड़का लग रहा था I उस समय खींची तस्वीरों में आपको  खुद-व-खुद स्थिति का अनुमान हो जाएगा I 
यह चैकर इंसान  को इंसान ही  नहीं समझते  अगर कोई बिना टिकट पकड़ा जाए उससे जुर्माना कबूल करो, न दे तो उचित कार्यवाही करो  उसे  भेड़  बकरियों की तरह इधर उधर न धसीटा  जाए  जैसे कोई सजा याफ्ता मुज़रिम  हो I  उसकी  बात पर भी गौर करना चाहिए कई बार जल्दवाज़ी  में टिकेट कहीं गिर भी सकती है खो सकती है I अब यह टिकेट चैकर बिना टिकट पकड़ी गई स्वारी को इधर उधर धसीट कर क्यों ले जाते हैं यह बतलाने की ज़रुरत ही नहीं आप सब खुद समझदार हैं उनकी मंशा जगजाहिर है I  और मुझे तो नहीं लगता कि बिना टिकट पकड़ी गई स्वारियों से चलान काटकर जितना जुर्माना इकठ्ठा करके वोह सब सरकारी खजानें  में जमा करवाते होंगे  वोह उन सबकी पगार से ज्यादा होता होगा I   
टिकेट चैकरों  को अपनी वाणी  पर नियंत्रण रखना चाहिए I कानून उन्हें उचित कार्यवाही का हक देता है अभद्रता का हरगिज़ नहीं I  क्या ऐसे टिकेट चैकरों  को भी सज़ा नहीं मिलनी चाहिए ?

परिकल्पना सम्मान (तृतीय) हेतु चयन....

परिकल्पना सम्मान (तृतीय) हेतु चयन....

परिकल्पना ब्लॉगोत्सव  और मैं

 एक व्यक्ति ने चाहा कि अंतर्जाल पर हिन्दी के माध्यम से नए समाज की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया जाये ....प्रयास किया ब्लॉग विश्लेषण से, फिर अचानक उसके जेहन मे आकार लेने लगी एक मौलिक परिकल्पना यानि -

ब्लॉगोत्सव 


परिकल्पना के संचालक-समन्वयक और हिंदी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात ने अपने छ: सहयोगियों क्रमश: अविनाश वाचस्‍पतिरश्मि प्रभाज़ाक़िर अली रजनीश,रणधीर सिंह सुमन,विनय प्रजापति और ललित शर्मा के साथ मिलकर वर्ष-2010 में अंतरजाल पर ब्लॉगोंत्सव मनाने का फैसला किया और इस उत्सव को नाम दिया “परिकल्पना ब्लॉग उत्सव″ इस उत्सव का नारा था – ” अनेक ब्लॉग नेक हृदय” इस उत्सव में अनेकानेक कालजयी रचनाएँ , विगत दो वर्षों में प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण ब्लॉग पोस्ट , ब्लॉग लेखन से जुड़े अनुभवों पर वरिष्ठ चिट्ठाकारों की टिप्पणियाँ ,साक्षात्कार , मंतव्य आदि का भव्यता के साथ प्रकाशन हुआ ।
यह उत्सव 15अप्रैल-2010 से 15 जून-2010 तक अर्थात दो महीने तक परिकल्पना की साइट पर निर्वाध रूप से चला और हिंदी ब्लॉगजगत में एक नए इतिहास के सृजन का साक्षी बना । ब्लॉग पर इस उत्सव को प्रायोजित किया बाराबंकी से प्रकाशित लोकसंघर्ष पत्रिका ने और इसमें उद्घोषित 51 ब्लॉगर्स को दिनांक 30 अप्रैल-2011 को हिंदी भवन दिल्ली में सारस्वत सम्मान देने का निर्णय लिया देश के एक बड़े प्रकाशन संस्थान हिन्दी साहित्य निकेतन बिजनौर ने ।इसी प्रकार वर्ष 2011 में यह उत्सव (द्वितीय संस्कारण ) अंतर्जाल पर 23 जून 2011 से 23 सितंबर 2011 तक निर्वाध रूप से परिकल्पना पर जारी रहा । इसका समापन विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देनेवाले वरिष्ठ तथा नए प्रतिभाशाली 51 चिट्ठाकारों के सारस्वत सम्मान से हुआ । उत्सव के दौरान सारगर्भित टिपण्णी देने वाले श्रेष्ठ टिप्पणीकार को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया । ब्लॉग पर इस उत्सव के द्वितीय संस्कारण को भी प्रायोजित किया बाराबंकी से प्रकाशित लोकसंघर्ष पत्रिका ने और इसमें उद्घोषित 51 ब्लॉगर्स को दिनांक 27 अगस्त-2012 को राय उमनाथ वली प्रेक्षागृह, लखनऊ में सारस्वत सम्मान देने का निर्णय लिया सामाजिक सांस्कृतिक संस्था तस्लीम ने ।

वहुमुखी प्रतिभा के धनी 

“रवीन्‍द्र प्रभात ब्‍लॉग जगत में सिर्फ एक कुशल रचनाकार के ही रूप में नहीं जाने जाते हैं, उन्‍होंने ब्‍लॉगिंग के क्षेत्र में कुछ विशिष्‍ट कार्य भी किये हैं। वर्ष 2007 में उन्‍होंने ब्‍लॉगिंग में एक नया प्रयोग प्रारम्‍भ किया और ‘ब्‍लॉग विश्‍लेषण’ के द्वारा ब्‍लॉग जगत में बिखरे अनमोल मोतियों से पाठकों को परिचित करने का बीड़ा उठाया। 2007 में पद्यात्‍मक रूप में प्रारम्‍भ हुई यह कड़ी 2008 में गद्यात्‍मक हो चली और 11 खण्‍डों के रूप में सामने आई। वर्ष 2009 में उन्‍होंने इस विश्‍लेषण को और ज्‍यादा व्‍यापक रूप प्रदान किया और विभिन्‍न प्रकार के वर्गीकरणों के द्वारा 25 खण्‍डों में एक वर्ष के दौरान लिखे जाने वाले प्रमुख ब्‍लागों का लेखा-जोखा प्रस्‍तुत किया। इसी प्रकार वर्ष 2010 में भी यह अनुष्‍ठान उन्‍होंने पूरी निष्‍ठा के साथ सम्‍पन्‍न किया और 21 कडियों में ब्‍लॉग जगत की वार्षिक रिपोर्ट को प्रस्‍तुत करके एक तरह से ब्‍लॉग इतिहास लेखन का सूत्रपात किया। 

ब्‍लॉग जगत की सकारात्‍मक प्रवृत्तियों को रेखांकित करने के उद्देश्‍य से अभी तक जितने भी प्रयास किये गये हैं, उनमें ‘ब्‍लॉगोत्‍सव’ एक अहम प्रयोग है। अपनी मौलिक सोच के द्वारा रवीन्‍द्र प्रभात ने इस आयोजन के माध्‍यम से पहली बार ब्‍लॉग जगत के लगभग सभी प्रमुख रचनाकारों को एक मंच पर प्रस्‍तुत किया और गैर ब्‍लॉगर रचनाकारों को भी इससे जोड़कर समाज में एक सकारात्‍मक संदेश का प्रसार किया।”

  • जन सन्देश टाइम्स ( हिंदी दैनिक), (01 मार्च 2011)


उस व्यक्ति ने सोचा 


क्यों न रचनात्मकता से जुड़े हुये सभी ब्लॉगर को एक वृहद मंच दिया जाये और हर क्षेत्र मे उल्लेखनीय कार्य करने वालों को प्रोत्साहन दिया जाये । बस क्या था उसने एक ऐसे बृहद सम्मान की उद्घोषणा कर दी, नाम दिया परिकल्पना सम्मान , जिसे बाद मे हिन्दी ब्लोगिंग का ऑस्कर कहा गया । 

कब-कब किसे मिला यह सम्मान 


परिकल्पना सम्मान-2010

1. वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लॉगर – अक्षिता पाखी,(पाखी की दुनिया) पोर्टब्लेयर (वर्तमान में इलाहाबाद)
2. वर्ष के श्रेष्ठ कार्टूनिस्ट – श्री काजल कुमार, दिल्ली (काजल कुमार के कार्टून)
3. वर्ष की श्रेष्ठ कथा लेखिका – श्रीमती निर्मला कपिला, नांगल (पंजाब)(वीर बहूटी)
4. वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक – डॉ. अरविन्द मिश्र, वाराणसी (साई ब्लॉग)
5. वर्ष की श्रेष्ठ संस्मरण लेखिका – श्रीमती सरस्वती प्रसाद, पुणे (मैं और मेरी सोच)
6. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक – श्री रवि रतलामी, भोपाल (छींटे और बौछारें)
7. वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृतान्त) – श्रीमती शिखा वार्ष्णेय, लंदन (स्पंदन)
8. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृतान्त) – श्री मनोज कुमार, कोलकाता (मनोज)
9. वर्ष के श्रेष्ठ चित्रकार – श्रीमती अल्पना देशपांडे, रायपुर (अल्पना की आर्ट गैलरी)
10. वर्ष के श्रेष्ठ हिन्दी प्रचारक – श्री शास्त्री जे.सी. फिलिप, कोच्ची, केरल (सारथी)
11. वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री – श्रीमती रश्मि प्रभा, पुणे (मेरी भावनाएं)
12. वर्ष के श्रेष्ठ कवि – श्री दिविक रमेश, दिल्ली (divik ramesh)
13. वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका – सुश्री शमा कश्यप, पुणे (संस्मरण)
14. वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार – श्री अविनाश वाचस्‍पति, दिल्ली (नुक्कड़)
15. वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका – सुश्री मालविका नीराजन, बैंगलोर (एक नया दिन चला ढूँढने.....)
16. वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक – श्री संजीव तिवारी, दुर्ग (म. प्र. )(आरंभ)
17. वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय कवि – श्री एम. वर्मा, वाराणसी(जज़्बात)
18. वर्ष के श्रेष्ठ गजलकार – श्री दिगम्बर नासवा, दुबई (स्वप्न मेरे)
19. वर्ष के श्रेष्ठ कवि (वाचन) – श्री अनुराग शर्मा, पिट्सबर्ग अमेरिका (पीट्सवर्ग में एक भारतीय)
20. वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका – श्रीमती प्रीति मेहता, सूरत (अंतरंग)
21. वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक – श्री दीपक मशाल, लंदन (मसि कागद)
22. वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार – श्रीमती संगीता स्वरूप, दिल्ली (गीत...मेरी अनुभूतियाँ)
23. वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार – श्री हिमांशु पाण्डेय, सकलडीहा (यू.पी.)(हिमांशु पाण्डेय की डायरी)
24-25-26. वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका – खुशबू/अपराजिता/इशिता, पटना (संयुक्त रूप से)
27. वर्ष के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार – श्री ज़ाक़िर अली रजनीश, लखनऊ
28. वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक) – श्री ललित शर्मा, रायपुर (ललित डॉट कॉम)
29. वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (गायन) – श्री राजेन्द्र स्वर्णकार, बीकानेर, राजस्थान (शस्वरं)
30-31. वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार – डॉ. रूपचंद्र शास्त्री ‘मयंक’, खटीमा एवं आचार्य संजीव वर्मा सलिल,(गीत सलिला) भोपाल (संयुक्त रूप से)
32. वर्ष की श्रेष्ठ देशभक्ति पोस्ट – कारगिल के शहीदों के प्रति ( श्री पवन चंदन)(चौखट)
33. वर्ष की श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट – झोलाछाप डॉक्टर (श्री राजीव तनेजा)(हँसते रहो)
34. वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि – श्री ओम आर्य, सीतामढ़ी बिहार(मौन के खाली घर मे)
35. वर्ष के श्रेष्ठ विचारक – श्री जी.के. अवधिया, रायपुर(धान के देश मे)
36. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक – श्री गिरीश पंकज, रायपुर (गिरीश पंकज)
37. वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक – श्रीमती नीलम प्रभा, पटना
38. वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी – श्री रणधीर सिंह सुमन, बाराबंकी (लोकसंघर्ष)
39. वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (पुरूष) – डॉ. सुभाष राय, लखनऊ (उ0प्र0)(बात बेवात)
40. वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (महिला) – श्रीमती संगीता पुरी, धनबाद(गत्यात्मक ज्योतिष)
41. वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लॉगर – श्री विनय प्रजापति, लखनऊ (उ0प्र0) संचालक:तकनीक दृष्टा खोलें
42. वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लॉगर – श्री खुशदीप सहगल, दिल्ली(देशनामा)
43. वर्ष के श्रेष्ठ नवोदित ब्लॉगर – श्री राम त्यागी, शिकागो अमेरिका (मेरी आवाज़)
44. वर्ष के श्रेष्ठ युवा पत्रकार – श्री मुकेश चन्द्र, दिल्ली
45. वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लॉगर – श्री ज्ञानदत्त पांडेय, इलाहाबाद (मानसिक हलचल)
46. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग शुभचिंतक – श्री सुमन सिन्हा, पटना (मैं हूँ )
47. वर्ष की श्रेष्ठ महिला ब्लॉगर – श्रीमती स्वप्न मंजूषा ‘अदा’, अटोरियो कनाडा (काव्य मंजूषा)
48. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉगर – श्री समीर लाल ‘समीर’, टोरंटो कनाडा (उड़न तश्तरी ....)
49. वर्ष की श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट – भविष्य का यथार्थ (लेखक – जिशान हैदर जैदी)
50. वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति – कैप्टन मृगांक नंदन एण्ड टीम, पुणे
51. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (हिन्दी चिट्ठाकारी विषयक पोस्ट) – श्री प्रमोद ताम्बट (व्यंग्य लोक), भोपाल

परिकल्पना सम्मान-2011

वर्ष के श्रेष्ठ कवि का सम्मान : अविनाश चंद्र (ब्लॉग : मेरी कलम से),
वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि का सम्मान : मुकेश कुमार सिन्हा (ब्लॉग : जिंदगी की राहें),
वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री का सम्मान : बाबूशा कोहली (ब्लॉगः बरिस्ता और कुछ पन्ने),
वर्ष की श्रेष्ठ युवा कवयित्री का सम्मान : अपराजिता कल्याणी (ब्लॉग : Thoughts.......)
वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (कथाकहानी) का सम्मान : चंडी दत्त शुक्ल (ब्लॉग : चौराहा ),
वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (संस्मरण) का सम्मान : दिनेश कुमार माली(ब्लॉगः सरोजनी साहू की श्रेष्ठ कहानियाँ),
वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (संस्मरण) का सम्मान : शिखा वार्ष्नेय (ब्लॉगः स्पंदन),
वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृतांत) का सम्मान : नीरज जाट(ब्लॉगः मुसाफिर हूँ यारों),
वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृतांत) का सम्मान : राजेश कुमारी (ब्लॉगः भारतीय नारी), 
वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (चर्चापरिचर्चा) का सम्मान : सुधा भार्गव (ब्लॉगः तुलिका सदन),
वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (सकारात्मक पोस्ट) का सम्मान : पल्लवी सक्सेना (ब्लॉगः मेरे अनुभव),
वर्ष के तकनीकी ब्लॉगर का सम्मान :शैलेश भारतवासी ब्लॉगः हिन्द युग्म,
वर्ष के युवा तकनीकी ब्लॉगर का सम्मानः नवीन प्रकाश (ब्लॉगः हिंदी टू टेक),
वर्ष के नवोदित ब्लॉगर का सम्मान : रवीद्र पुंज (ब्लॉगः यमुना नगर हलचल),
वर्ष के उदीयमान ब्लॉगर का सम्मान : संतोष त्रिवेदी(ब्लॉगः बैसवारी),
वर्ष के यशस्वी ब्लॉगर का सम्मानः जय प्रकाश तिवारी(ब्लॉगः प्रज्ञानविज्ञान),
वर्ष के आदश ब्लॉगर का सम्मान : सलिल वर्मा (ब्लॉगः चला बिहारी ब्लॉगर बनने),
वर्ष के श्रेष्ठ ग़ज़लकार का सम्मान : इस्मत जैदी (ब्लॉगःशेफा कजगाँवी),
वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार का सम्मान : डॉ रूप चंद शास्त्री 'मयंक’ (ब्लॉगः उच्चारण),
वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग खबरी का सम्मान : अजय कुमार झा (ब्लॉगः झा जी कहिन ),
वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग समीक्षक का सम्मान : अरविंद श्रीवास्तव(ब्लॉगः जनशब्द),
वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक का सम्मान : राहुल सिंह(ब्लॉग : सिंहावलोकन),
वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार का सम्मान : प्रेम जनमेजय(ब्लॉग : प्रेम जनमेजय),
वर्ष के श्रेष्ठ युवा व्यंग्यकार का सम्मान : सुमित प्रताप सिंह (ब्लॉग : सुमित प्रताप सिंह ),
वर्ष के श्रेष्ठ बाल रचनाओं के लेखक का सम्मान : कैलाश शर्मा (ब्लॉग : बच्चों का कोना ),
वर्ष के श्रेष्ठ वॉयस ब्लॉगर का सम्मानः अर्चना चाव जी (ब्लॉग : मेरे मन की) और गिरीश बिल्लोरे मुकुल, (ब्लॉग : मिसफिट सीधी बात) को संयुक्त रूप से,
वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक का सम्मान : दशर्न लाल बवेजा (ब्लॉग : विज्ञान गतिविधियाँ ),
वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार (पुरुष) का सम्मान : धीरेन्द्र (ब्लॉग : मेरा मन, काव्यांजलि, फुहार ),
वर्ष की श्रेष्ठ टिप्पणीकार (महिला) का सम्मान : सीमा सिंघल (ब्लॉग : सदा),
वर्ष के श्रेष्ठ पत्रकार का सम्मान : अमलेंदु उपाध्यायः संपादक (वेब पत्रिका हस्तक्षेप),
वर्ष के श्रेष्ठ अनुवादक का सम्मान : सिद्धेश्वर सिंह (ब्लॉग : कर्मनाशा),
वर्ष के चर्चित ब्लॉगर (पुरुष) का सम्मान : शाहनवाज (ब्लॉग : प्रेम रस),
वर्ष की चर्चित ब्लॉगर (महिला) का सम्मान :रंजना (रंजू) भाटिया (ब्लॉग :कुछ मेरी कलम से),
वर्ष के श्रेष्ठ एग्रीगेटर का सम्मान : (हमारी वाणी) ।
विशोष ब्लॉग प्रतिभा के अंतर्गत : कनिष्क कश्यप( हिंदुस्तान का दर्द), सुनीता सानू, (मन पखेरू फिर उड़ गया), निर्मल गुप्त (कांवकांव), अल्का सैनी(अल्का सैनी की कहानियाँ), कुँवर कुसुमेश( Kunwar Kusumesh), मुकेश कुमार तिवारी (कवितायन), डॉ. प्रीत अरोरा (मेरी साधना) और डॉ हरीश अरोड़ा (साहित्यकार संसद)

परिकल्पना ब्लॉगर दशक सम्मान-2012
दशक के ब्लॉगर : पूर्णिमा वर्मन, समीर लाल समीर(ब्लॉग : उड़न तश्तरी ),रवि रतलामी (ब्लॉग : छींटे और बौछारें), रश्मि प्रभा (ब्लॉग : मेरी भावनाएं )और अविनाश वाचस्‍पति।
दशक के ब्लॉग :
(उड़न तश्तरी) : ब्लॉगर समीर लाल 'समीर॔, (ब्लॉग्स इन मीडिया) : ब्लॉगर बी.एस. पावला,(नारी/ NAARI ) ब्लॉगर रचना, (साई ब्लॉग) ब्लॉगर डॉ. अरविंद मिश्र, (साइंस ब्लॉगर असोसिएशन) : ब्लॉगर डॉ अरविंद मिश्र, डॉ. जाकिर अली रजनीश।
दशक के ब्लागर दंपत्ति : (कृष्ण कुमार यादव )और (आकांक्षा यादव) 

ब्लॉगोत्सव (तृतीय)

             इस वर्ष यह उत्सव क्रमश: परिकल्पनावटवृक्ष और परिकल्पना ब्लॉगोत्सव पर एक साथ आयोजित हुआ । दिनांक 01.12.2012 से दिनांक 01.01.2013 तक आयोजित इस उत्सव का संचालन मैंने यानि  रश्मि प्रभा ने किया। अवकाश की तिथि को छोडकर पच्चीस दिनों की इन भव्य प्रस्तुतियों  में कुल 155 पोस्ट प्रकाशित हुये । 565 रचनाकारों ने हिस्सा लिया । कुछ महत्वपूर्ण शख़्सियतों हम रूबरू भी हुये , जिसमें प्रमुख हैं सुर साम्राज्ञी लता मंगेसकर,अरुण कमल,मैत्रेयी पुष्पा,नरेश सक्सेना,प्रताप सहगल,प्रो कृष्ण कुमार गोस्वामी,दीक्षित दनकौरी मनीषा कुलश्रेष्ठ,सुभाष नीरव,डॉ अनीता कपूर, महेंद्र भटनागर,अभिनेत्री साधना सिंह आदि । 

परिकल्पना सम्मान (तृतीय) हेतु चयन 

परिकल्पनापरिकल्पना ब्लागोत्सव और वटवृक्ष के इस ऐतिहासिक मंच पर -
1दिसम्बर से अब तक कई विषयों से सम्बंधित रचनाएँ लिखे और पढ़े गए - 
कहानी,कविता,संस्मरण,लघुकथा,समीक्षा,क्षणिकाएं ,हाइकु,आलेख,व्यक्तित्व विश्लेषण, ...... 
अपनी पसंद के नाम लिखते जाएँ ....... 
निःसंदेह , सबकुछ ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय हमारा,
विशेषकर मेरा होगा (रवीन्द्र प्रभात जी के अनुसार). 

शिकायतें कभी खत्म नहीं होतीं,उनका भी अपना एक स्रोत है .... लहरें घातक ना हों,इसलिए पहला वोट आपका - फिर उस आधार पर मेरा !

आपकी-
रश्मि प्रभा 


http://www.parikalpnaa.com/2013/01/blog-post_4246.html

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